मुस्कुरा के रह गए , कहना ठीक ना जाना हमने ,
कुछ यूँ पाया है जीने का बहाना हमने
अपने अंजाम की हमको ही खबर रही यूँ तो ,
उसकी गली में रोज़ किया है आना जाना हमने
जाते जाते जायेंगे ये फुरक़त के गम भी ,
कुरेदा है आज फिर एक ज़ख्म पुराना हमने
इस क़दर अज़ीज़ थे तेरी जफ़ाओं के करिश्मे ,
हर बार किया है दिल को निशाना हमने
Beautiful
ReplyDelete