एहद पर अपने वो कायम ऐसे हैं
ज़ख्म ये दिल को कि मरहम जैसे हैं
रत्ती रत्ती सुकूँ हमने यहाँ भी पाया ,
बादा -ओ -सागर भी अब तो दैर -ओ -हरम जैसे हैं
एक कौर को रोटी , एक दस्त -ए -दुआ ,
अल्लाह जाने ये ग़म कैसे हैं
दामन दामन लहू लहू , हाथ हाथ को खंजर ,
कुछ हम उन जैसे, कुछ वो हम जैसे हैं
दस्त -ए -दुआ =hand raised in prayer
बादा -ओ -सागर = wine and goblet
ज़ख्म ये दिल को कि मरहम जैसे हैं
रत्ती रत्ती सुकूँ हमने यहाँ भी पाया ,
बादा -ओ -सागर भी अब तो दैर -ओ -हरम जैसे हैं
एक कौर को रोटी , एक दस्त -ए -दुआ ,
अल्लाह जाने ये ग़म कैसे हैं
दामन दामन लहू लहू , हाथ हाथ को खंजर ,
कुछ हम उन जैसे, कुछ वो हम जैसे हैं
दस्त -ए -दुआ =hand raised in prayer
बादा -ओ -सागर = wine and goblet