क्या कहूँ कैसे ये उम्र-ए-सोगवार गुज़री है ,
ज़ख्म -ए -जिगर से नश्तर सी बार बार गुज़री है
गुज़रे हैं सेहरा-ए- दिल से कितनी हसरतों के काफ़िले ,
जागती आँखों में कैसे शब् -ऐ -इंतज़ार गुज़री है
दिल ही था जो न माना कि हम दूर हो चले ,
वो आये तो ख़बर गलियों से कई बार गुज़री है
अब इस ख़याल से तस्कीन है दिल -ऐ -नाकाम को ,
हम पर जो बीती , कुछ उन पर भी यार गुज़री है
1 ) सोगवार = sorrowful / grieved
2) तस्कीन = comfort, consolation