Monday, November 16, 2009

Dekhiye

zeest kaisi hai mujh par meherbaan dekhiye,
raqeeb tak puchey hai mera makaan dekhiye

umr bhar raha jinse humein tagaful ka gilaa,
hain wo aaj kis qadar pareshaan dekhiye

hai shama mein zor bas sehar ki dastak talaq,
hum ji rahey hain kaise ye imtehaan dekhiye

umeedon ka humney jahan ik ghar banaya kabhi,
wo gali hai aaj kaisi veeraan dekhiye

Sunday, November 15, 2009

एक बूँद ओस

एक बूँद ओस ,
और दो पलकें नम

महकी सी ये खुशियाँ ,
चुभते से ये गम

कहीं जेठ का तपता सूरज ,
कहीं बूंदों में गाता सावन

घर अपनों का प्यार सहेजे ,
तुलसी का वो पावन आँगन

कहीं बुलाती क्षुधा सुंदरी ,
कहीं तृप्ति का मौन आलिंगन

कभी सुरों के मेले सजते ,
कभी मौन का नीरव गुंजन

इसी अर्थ में सिमटा फैला ,
पल पल बीता मेरा जीवन
पल पल बीता मेरा जीवन

Thursday, November 12, 2009

हयात

कैसे बताएं खुद से कैसे घबराये हैं हम ,
कू-ऐ-यार तक पहुंचे कि लौट आये हैं हम ....


मेरी चुप को वो समझे है बेरुखी या रब ,
दिल की भला होंठों पे कब लाये हैं हम ...


क्यूँकर न गुज़रेगी ये शाम-ऐ-बेकसी ,
दिल -ऐ -ज़ार पे जो नश्तर से उतर आये हैं हम ...


गिरफ्त -ए-जुनूँ में कुछ यूँ भी गुज़री है हम पे ,
खुद ही से अजनबी से पेश आये हैं हम ...


गुमनाम शक्लों
की भीड़ में हारती तलाश है ,
फिर हुआ कि थके थके से घर आये हैं हम ...

 मिल्कियत सारी ये तेरी नज़र करता हूँ , तेरे शहर से कहीं दूर अब मैं घर करता हूँ .....   उजालों के साथी कुछ दूर तलक आये , किसे मालूम अंधेरों मे...