एक बूँद ओस ,
और दो पलकें नम
महकी सी ये खुशियाँ ,
चुभते से ये गम
कहीं जेठ का तपता सूरज ,
कहीं बूंदों में गाता सावन
घर अपनों का प्यार सहेजे ,
तुलसी का वो पावन आँगन
कहीं बुलाती क्षुधा सुंदरी ,
कहीं तृप्ति का मौन आलिंगन
कभी सुरों के मेले सजते ,
कभी मौन का नीरव गुंजन
इसी अर्थ में सिमटा फैला ,
पल पल बीता मेरा जीवन
पल पल बीता मेरा जीवन
और दो पलकें नम
महकी सी ये खुशियाँ ,
चुभते से ये गम
कहीं जेठ का तपता सूरज ,
कहीं बूंदों में गाता सावन
घर अपनों का प्यार सहेजे ,
तुलसी का वो पावन आँगन
कहीं बुलाती क्षुधा सुंदरी ,
कहीं तृप्ति का मौन आलिंगन
कभी सुरों के मेले सजते ,
कभी मौन का नीरव गुंजन
इसी अर्थ में सिमटा फैला ,
पल पल बीता मेरा जीवन
पल पल बीता मेरा जीवन
ek boond os aur do palkein nam ..kaise socha yeh ?
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