ये तो नहीं कि दिल दुखता नहीं अब मगर कभी कभी,
खामोशियों में घुल सी जाती हैं शब्-ओ-सहर कभी कभी
इस इक यकीन पे कायम हैं मेरे सजदे अब तक,
दुआओं में भी होता है असर कभी कभी
पानी पे लकीरों सी मुक़द्दर तेरे मेरे प्यार की,
दिल को दिल की होती है खबर कभी कभी
खुशियों को पता दूँ कि आ भी जाएँ ,
याद आये जो उन्हें मेरा घर कभी कभी
खामोशियों में घुल सी जाती हैं शब्-ओ-सहर कभी कभी
इस इक यकीन पे कायम हैं मेरे सजदे अब तक,
दुआओं में भी होता है असर कभी कभी
पानी पे लकीरों सी मुक़द्दर तेरे मेरे प्यार की,
दिल को दिल की होती है खबर कभी कभी
खुशियों को पता दूँ कि आ भी जाएँ ,
याद आये जो उन्हें मेरा घर कभी कभी