नहीं कुछ और मैं तेरी राहों में एक मंज़र सही ,
पास आ कि मैं सेहरा सही तू समंदर सही
आकर ठहरें तेरी यादों के काफिले कभी,
दिल अपना एक वीरान शहर सही
मैं वो रिंद नहीं कि शराबों को तोलूं ,
गम – ए -यार नहीं मुझको गम -ए-दहर सही
1) रिंद = drunkard, free thinker
2) दहर = world
3) वक़्त -ए -अजल = time of end, death
wah wah! Wah ustaad wah!
ReplyDeletedhanyawaad :)
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