हम जो हर दम अपने दम से गए ,
कभी तेरे , कभी अपने गम से गए
गए उन तक जो पैगाम -ऐ -वफ़ा मेरे ,
कभी ज़ख्म -ऐ -जिगर कभी चश्म -ऐ -नम से गए
गुज़रा है ये सफ़र यूँ भी तेरे बिन ,
चले कुछ दूर और थम से गए
तेरे साथ थी हयात धूप छाँव सी ,
बिन तेरे ये मौसम भी कुछ नम से गए