हम जो हर दम अपने दम से गए ,
कभी तेरे , कभी अपने गम से गए
गए उन तक जो पैगाम -ऐ -वफ़ा मेरे ,
कभी ज़ख्म -ऐ -जिगर कभी चश्म -ऐ -नम से गए
गुज़रा है ये सफ़र यूँ भी तेरे बिन ,
चले कुछ दूर और थम से गए
तेरे साथ थी हयात धूप छाँव सी ,
बिन तेरे ये मौसम भी कुछ नम से गए
wah wah dost, this is really good
ReplyDeletetera har title poem kyun hota hai be ... change karo .. title to soch hi sakte ho
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