Sunday, January 8, 2012

फिर


फिर  रात  जागेगी, फिर  ख्वाब  होंगे,
फिर  शहर  में, हम  से  खराब  होंगे

फिर  प्यास  को  होगी  राहतों  की  मंज़िल,
फिर  तेरे  लबों  के  सुर्ख़  गुलाब  होंगे

बज़्म -ए -गैर  में  जो  होंगे  रु -ब -रु,
कुछ  सवाल  मेरे, कुछ  तेरे  जवाब  होंगे

सुबह -ओ -शाम  ये  नम  इक  तेरे  ख़याल  से,
होश  के  नाम  अब  कौन  से  सराब  होंगे 


Note : सराब  = mirage
  

 मिल्कियत सारी ये तेरी नज़र करता हूँ , तेरे शहर से कहीं दूर अब मैं घर करता हूँ .....   उजालों के साथी कुछ दूर तलक आये , किसे मालूम अंधेरों मे...