रहे हम पास भी तो फासले दरमियाँ रहे ,
ज़मीन से दूर दूर जैसे कि आसमाँ रहे .....
हर रात जागा है ये सोच के आँगन मेरा .....
कभी चांदनी भी घर मेरे मेहमान रहे ..
ये नहीं कि उसे माँगा नहीं है रात दिन ...
पर मिले जब तो मुझ सा ही कुछ परेशान रहे
रहें तेरी यादों के साये साथ अगर तो यूँ ...
कहीं दयार-ए -गम , कहीं दर्द का कारवाँ रहे
ज़मीन से दूर दूर जैसे कि आसमाँ रहे .....
हर रात जागा है ये सोच के आँगन मेरा .....
कभी चांदनी भी घर मेरे मेहमान रहे ..
ये नहीं कि उसे माँगा नहीं है रात दिन ...
पर मिले जब तो मुझ सा ही कुछ परेशान रहे
रहें तेरी यादों के साये साथ अगर तो यूँ ...
कहीं दयार-ए -गम , कहीं दर्द का कारवाँ रहे