Sunday, March 20, 2011

रू-ब-रू

बाकी कितने हैं सितम मेरे हिस्से इस जहाँ में ,

क्या से क्या हुए हम शहर -ऐ -बुतान में


मजबूरियां इस दिल -ए -नाकाम की ,

उतरी हैं उनकी चुप में , या अपनी ज़ुबां में



महफ़िल में वो छुपाते हैं नज़र मुझसे ,

माज़ी जिनका है शामिल मेरी दास्तान में


ना पूछिए कैसे रोके हैं खुद को हम ,

क़ैद कितने हैं तूफ़ान मेरी तर्ज़ -ऐ -बयान में ...

Wednesday, March 9, 2011

एक से

रंग रंग सब अलग ,
रंग रंग एक से

एक रंग कौन जिसने ,
रंगे रंग एक से

धूप छाँव दो मगर
खेल सब हैं एक से

पास पास हैं मगर ,
दूर सब हैं एक से

सुर साज़ ताल लय ,
मौन हों तो एक से

राह राह हर कदम ,
ठहर पड़ें तो एक से

"It is in our wanderings that we seem different, it is in our stillness that we are one..
it is in our echoes that we become distant.. it is in our silence that we are closer ........."

 मिल्कियत सारी ये तेरी नज़र करता हूँ , तेरे शहर से कहीं दूर अब मैं घर करता हूँ .....   उजालों के साथी कुछ दूर तलक आये , किसे मालूम अंधेरों मे...