इलाही मेरे जुनून को कभी आराम तो दे ,
राहत ना सही, इन बेचैनियों को कोई नाम तो दे ...
मुद्दत हुई कि आरज़ू भटकती रही इस दयार में ,
आगाज़ ना सही, इस सफ़र को कोई अंजाम तो दे ...
ज़िन्दा लाशों की भीड़ है हर सिम्त यहाँ ,
इस शहर के नसीब में कोई कोहराम तो दे ...
नन्ही कलियों की खुशबू जहाँ महफूज़ रह सके ,
मेरे चमन को ऐसी सुबह -ओ -शाम तो दे ..
मेरे हौसलों की बुलंदी तू परख ले मगर ,
हसरत-ए - गुनाह को मेरी उम्र-ए -दवाम तो दे ...
Note :
उम्र-ए -दवाम = eternal life
..
राहत ना सही, इन बेचैनियों को कोई नाम तो दे ...
मुद्दत हुई कि आरज़ू भटकती रही इस दयार में ,
आगाज़ ना सही, इस सफ़र को कोई अंजाम तो दे ...
ज़िन्दा लाशों की भीड़ है हर सिम्त यहाँ ,
इस शहर के नसीब में कोई कोहराम तो दे ...
नन्ही कलियों की खुशबू जहाँ महफूज़ रह सके ,
मेरे चमन को ऐसी सुबह -ओ -शाम तो दे ..
मेरे हौसलों की बुलंदी तू परख ले मगर ,
हसरत-ए - गुनाह को मेरी उम्र-ए -दवाम तो दे ...
Note :
उम्र-ए -दवाम = eternal life
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