Saturday, October 12, 2013

poem

सूरत-ए-यार है कि निगाह से हटती नहीं ,
रात लम्बी तो नहीं मगर कटती नहीं ....

सजदों के आंसू हों कि बच्चों की हंसी ,
ये जागीर है ऐसी कि बंटती नहीं ...

अँधेरी गलियों में लोरियां रोती हैं इस बात पर ,
भूख बच्चों की अब उनसे मिटती नहीं ..

चाहा कि उसे खुदा से माँग लें मगर ,
वो नेमत किसी दुआ में सिमटती नहीं ...

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