मुन्तज़िर हूँ कि कभी दर्द -ए -इश्क़ आज़माए मुझको भी ,
यूँ भूला हूँ कि कोई तो याद आये मुझको भी
रह गयी हैं क़ैद कागजों में निशात -ओ -ग़म की बातें ,
फ़साना-ए -हस्ती दुनिया कभी सुनाये मुझको भी
दर खुदा का दूर महबूब का भी ,
कोई तो राह दिखाए मुझको भी
हो गया हूँ खुद ही से गैर किस क़दर ,
मिलते हैं यूँ तो अपने पराये मुझको भी
जल्वानशीं रहा वो किस अदा से चारसू
क्या क्या ना जलवे दिखाए मुझको भी
note : 1) मुन्तज़िर = in waiting
2) निशात -ओ -ग़म = happiness and sorrow
3) चारसू = in all directions
यूँ भूला हूँ कि कोई तो याद आये मुझको भी
रह गयी हैं क़ैद कागजों में निशात -ओ -ग़म की बातें ,
फ़साना-ए -हस्ती दुनिया कभी सुनाये मुझको भी
दर खुदा का दूर महबूब का भी ,
कोई तो राह दिखाए मुझको भी
हो गया हूँ खुद ही से गैर किस क़दर ,
मिलते हैं यूँ तो अपने पराये मुझको भी
जल्वानशीं रहा वो किस अदा से चारसू
क्या क्या ना जलवे दिखाए मुझको भी
note : 1) मुन्तज़िर = in waiting
2) निशात -ओ -ग़म = happiness and sorrow
3) चारसू = in all directions