ये चाँद कई रातों में जागा है तनहा ऐसे ,
किसी मज़ार पे रखा हो कोई दिया जैसे
मिलती है ज़िन्दगी हर मोड़ पे अब यूँ ,
किसी फ़कीर के हिस्से की दुआ हो जैसे
है वो आशना मुझसे कुछ इस तरह ,
जाने है सब और कुछ भी न पता हो जैसे
गुज़रे हैं दिल पे हसरतों के मुक़ाम ऐसे ,
दर -ऐ -क़फ़स से गुज़रती सबा हो जैसे
Note :
आशना = acquainted
क़फ़स = prison
सबा = breeze
किसी मज़ार पे रखा हो कोई दिया जैसे
मिलती है ज़िन्दगी हर मोड़ पे अब यूँ ,
किसी फ़कीर के हिस्से की दुआ हो जैसे
है वो आशना मुझसे कुछ इस तरह ,
जाने है सब और कुछ भी न पता हो जैसे
गुज़रे हैं दिल पे हसरतों के मुक़ाम ऐसे ,
दर -ऐ -क़फ़स से गुज़रती सबा हो जैसे
Note :
आशना = acquainted
क़फ़स = prison
सबा = breeze