चल ऐ दिल की अब जहाँ करार मिले ,
दिल का दिल पे जहाँ ऐतबार मिले
रहे सलामत हुस्न मिल्कियत तेरी ,
हम ढूँढ़ते हैं गर कोई गमगुसार मिले
फर्श से अर्श तक ज़िक्र है तो उसका ,
कहाँ उस सा दूसरा कोई यार मिले
मय है बेचैन साकी भी बेकरार सा ,
मुझ सा भी कोई बादाख्वार मिले
गम -ए-दहर ने अजब क़यामत है ढाई ,
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