ये चाँद कई रातों में जागा है तनहा ऐसे ,
किसी मज़ार पे रखा हो कोई दिया जैसे
मिलती है ज़िन्दगी हर मोड़ पे अब यूँ ,
किसी फ़कीर के हिस्से की दुआ हो जैसे
है वो आशना मुझसे कुछ इस तरह ,
जाने है सब और कुछ भी न पता हो जैसे
गुज़रे हैं दिल पे हसरतों के मुक़ाम ऐसे ,
दर -ऐ -क़फ़स से गुज़रती सबा हो जैसे
Note :
आशना = acquainted
क़फ़स = prison
सबा = breeze
किसी मज़ार पे रखा हो कोई दिया जैसे
मिलती है ज़िन्दगी हर मोड़ पे अब यूँ ,
किसी फ़कीर के हिस्से की दुआ हो जैसे
है वो आशना मुझसे कुछ इस तरह ,
जाने है सब और कुछ भी न पता हो जैसे
गुज़रे हैं दिल पे हसरतों के मुक़ाम ऐसे ,
दर -ऐ -क़फ़स से गुज़रती सबा हो जैसे
Note :
आशना = acquainted
क़फ़स = prison
सबा = breeze
जो गर्दिश-ए-जश्न मनाने का शौक रखते हैं, उन्हीं की जिन्दगी नजीर हुआ करती है।
ReplyDeleteसुहाने फूल तो कोई भी सूंघ लेता है , काबिल-ए-गौर हैं, कांटों को तोड़ने वाले ॥
kya baat hai Sir.. thanks
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