तू रहे , मैं रहूँ और ये जहाँ रहे ,
आँखों में नमी कुछ पैरों में थकान रहे
यूँ तो मसलहत से रहे मजबूर दोनों ,
पर क्या है ये जो अपने दरमयां रहे
और कुछ छीन भी ले ये दुनिया लेकिन ,
तितली को फूल यहाँ परिंदों को आसमान रहे
मिट्टी के इन घरों में हया सिमटी है ,
दुआ करो खुदा इनका निगेहबान रहे
आये मुक़ाबिल जो तक़दीर तो उस दम ,
कि सुबह में रात का कुछ निशाँ रहे
आँखों में नमी कुछ पैरों में थकान रहे
यूँ तो मसलहत से रहे मजबूर दोनों ,
पर क्या है ये जो अपने दरमयां रहे
और कुछ छीन भी ले ये दुनिया लेकिन ,
तितली को फूल यहाँ परिंदों को आसमान रहे
मिट्टी के इन घरों में हया सिमटी है ,
दुआ करो खुदा इनका निगेहबान रहे
आये मुक़ाबिल जो तक़दीर तो उस दम ,
कि सुबह में रात का कुछ निशाँ रहे
bahut acche !!
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