ठहर जाती है दास्तान एक इसी सवाल पर,
कभी तेरे उरूज पर, कभी मेरे ज़वाल पर
ख़याल-ए-यार से घबरा रहा हूँ मैं,
सौ पहरे लगे हैं एक हसरत-ए-विसाल पर
परत दर परत खुली असीरी मुझ पर जहान की,
कोई डरा है मुस्तक़बिल से, कोई रो रहा है हाल पर
हर साँस कोई सानेहा सा साथ है ,
कई तीर खिंच गए हैं एक सहमे ग़ज़ाल पर
****************************
उरूज = ascension, rising
ज़वाल = decline
हसरत-ए-विसाल = desire to meet
असीरी = imprisonment
मुस्तक़बिल =future
सानेहा = an accident, disaster,
ग़ज़ाल = young deer
कभी तेरे उरूज पर, कभी मेरे ज़वाल पर
ख़याल-ए-यार से घबरा रहा हूँ मैं,
सौ पहरे लगे हैं एक हसरत-ए-विसाल पर
परत दर परत खुली असीरी मुझ पर जहान की,
कोई डरा है मुस्तक़बिल से, कोई रो रहा है हाल पर
हर साँस कोई सानेहा सा साथ है ,
कई तीर खिंच गए हैं एक सहमे ग़ज़ाल पर
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उरूज = ascension, rising
ज़वाल = decline
हसरत-ए-विसाल = desire to meet
असीरी = imprisonment
मुस्तक़बिल =future
सानेहा = an accident, disaster,
ग़ज़ाल = young deer
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