Thursday, July 18, 2013

उलझन

कौन कहता है  उजड़े दिलों में चाहत नहीं होती
ये और है कि बुतों की हमसे इबादत नहीं होती

बहुत लम्बा है खामोशियों का सफ़र अपना  ,
सच कहने की मगर अब  हिम्मत नहीं होती

उलझे रास्तों का धीमा सफ़र है
ज़िन्दगी शायद और खूबसूरत नहीं होती

चाँद सितारों की, जुल्फों की बात करते ,
ज़िन्दगी मगर तुझसे फुर्सत नहीं होती














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 मिल्कियत सारी ये तेरी नज़र करता हूँ , तेरे शहर से कहीं दूर अब मैं घर करता हूँ .....   उजालों के साथी कुछ दूर तलक आये , किसे मालूम अंधेरों मे...