Sunday, November 27, 2011

कभी कभी

ये तो नहीं कि दिल दुखता नहीं अब मगर कभी कभी,
खामोशियों में घुल सी जाती हैं शब्-ओ-सहर कभी कभी

इस इक यकीन पे कायम हैं मेरे सजदे अब तक,
दुआओं में भी होता है असर कभी कभी

पानी पे लकीरों सी मुक़द्दर तेरे मेरे प्यार की,
दिल को दिल की होती है खबर कभी कभी

खुशियों को पता दूँ कि आ भी जाएँ ,
याद आये जो उन्हें मेरा घर कभी कभी  

4 comments:

  1. wah wah...mashallah....aankh mein aason aa gaye....sache dil se byan ki hui yeh dastaan....!!!

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  2. bahut jazbati likha hai sir....dil ko cheer dene waladard. very nice.
    ' इस इक यकीन पे कायम हैं मेरे सजदे अब तक,
    दुआओं में भी होता है असर कभी कभी ' ... :)

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