मगर ख्वाबों का वो जहाँ नहीं मिला
कहीं दो पल ठहरने को ये ज़मीन ,
कहीं उड़ने को आसमान नहीं मिला
गुज़री हम पर जो इन राहों पे ऐ दिल ,
कहते मगर वो राज़दां नहीं मिला
ढूंढता हूँ दश्त -ओ -सेहरा में जिसको ,
बिछड़ा जो फिर वो कारवां नहीं मिला
कहीं दो पल ठहरने को ये ज़मीन ,
कहीं उड़ने को आसमान नहीं मिला
गुज़री हम पर जो इन राहों पे ऐ दिल ,
कहते मगर वो राज़दां नहीं मिला
ढूंढता हूँ दश्त -ओ -सेहरा में जिसको ,
बिछड़ा जो फिर वो कारवां नहीं मिला
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