हमने माना कि वो बहुत दाना है,
दिल-ए -मजबूर का मगर अपना ही फ़साना है ....
बदल लेगा वो शहर भर के रास्ते लेकिन ,
अपने घर उसने इसी गली से जाना है ....
हर गाम पर रोके हैं ये चाँद ये तारे ये जुगनू ,
दिन के मुसाफिर ने मगर सहर तक जाना है ....
इश्क़ की हमसे अब और न कहिये ज़ाहिद,
बीमार बदल जाते हैं, पर मर्ज़ पुराना है ....
दाना = wise
गाम = step
दिल-ए -मजबूर का मगर अपना ही फ़साना है ....
बदल लेगा वो शहर भर के रास्ते लेकिन ,
अपने घर उसने इसी गली से जाना है ....
हर गाम पर रोके हैं ये चाँद ये तारे ये जुगनू ,
दिन के मुसाफिर ने मगर सहर तक जाना है ....
इश्क़ की हमसे अब और न कहिये ज़ाहिद,
बीमार बदल जाते हैं, पर मर्ज़ पुराना है ....
दाना = wise
गाम = step
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