Monday, August 29, 2016

सीता राम सीता राम

और बचा नहीं कौन्हो काम
मिट्ठू बोले सीता राम सीता राम

सुख दुःख जितने सब ही देखे
पाए जो कुछ खो कर देखे
मन को सब अब रैन और घाम
मिट्ठू बोले सीता राम सीता राम

 बेर रहे सबरी के झूठे
घर मिटटी के सब ही टूटे
रुका कहाँ पर कोई काम
मिट्ठू बोले सीता राम सीता राम

खीर पूरी दही बताशे
कुछ दिन आते कुछ दिन जाते
काटी मिर्ची नोचे आम
मिट्ठू बोले सीता राम सीता राम

रैन थकन की दिन का रोना
मिट्ठू ढूँढे कोना कोना
कितने  आखर कितने नाम
मिट्ठू कह गए  सीता राम सीता राम 

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