यूँ तो न था कि वो न थे हमारे कभी,
यूँ रहा कि जीते कभी और हम हारे कभी...
अब ये गर्द -ए -सफ़र हुई नसीब अपना ,
साथ थे जहाँ फूल खुशबू चाँद तारे कभी....
नींद आ भी जाए किसी रात हमको ,
ख़्वाब इन पलकों से कोई उतारे कभी ....
देहलीज़ पर हमने एक चिराग रख दिया,
भेजे हवाओं ने जब भी इशारे कभी ....
यूँ रहा कि जीते कभी और हम हारे कभी...
अब ये गर्द -ए -सफ़र हुई नसीब अपना ,
साथ थे जहाँ फूल खुशबू चाँद तारे कभी....
नींद आ भी जाए किसी रात हमको ,
ख़्वाब इन पलकों से कोई उतारे कभी ....
देहलीज़ पर हमने एक चिराग रख दिया,
भेजे हवाओं ने जब भी इशारे कभी ....
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